म्यूचुअल फण्ड निवेश

स्रोत–यूटीआई म्यूचुअल फण्ड


आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न
 
म्यूचुअल फण्ड क्या है?
म्यूचुअल फण्ड एक भरोसा होता है। यह निवेशकों के पारिभाषित लक्ष्य तथा प्रतिभूतियों के विभिन्न विभागों के निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत पैसे की वसूली करती है। विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों में संपति प्रबंधन कंपनी द्वारा वसूले गए इन पैसों का निवेश किया जाता है। इसमें विशेष योजना के तहत निवेश के लक्ष्यों पर शेयर, ऋण पत्र विनिमय, प्रतिभूति, बाजार में मुद्रा के यंत्र तथा अन्य प्रतिभूतियां शामिल होती हैं। इस तरह के लक्ष्य प्रस्ताव पत्र में साफ–साफ दिए गए होते हैं। यह कोष निवेश में दो तरह से मूल्य जोड़ता है। अर्जित की गई आय तथा बिक्री के द्वारा अन्य पूंजी के संपादन द्वारा। इसे यूनिटधारकों को उनके पास उपलब्ध इकाइयों के आधार पर बांटा जाता है। 
 
 
संपति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) क्या है?
एएमसी दैनिक प्रशासन से जुड़ी हुई है और कोष के लिए निवेश में सलाहकार का काम करती है। संपति प्रबंधन कंपनी क एक प्रायोजक द्वारा आगे बढ़ाया जाता है जिसका संबंध किसी प्रमुख कार्पोरेट संस्था से होता हैं।

  • कोष प्रबंधन
  • विक्रय तथा विपणन
  • संचालन तथा लेखा

विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड योजनाएं क्या है?
म्यूचुअल फंड योजना को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है
 
ढांचे के आधार पर
ओपेन–एन्डेड योजनाएं
क्लोज एन्डेड योजनाएं
मध्याविध योजनाएं
 
निवेश लक्ष्य के अनुसार
वृद्धि योजनाएं
आय योजनाएं
संतुलन योजनाएं
मुद्रा बाजार योजनांए
 
योजनाओं के अन्य प्रकार
कर बचत योजनाएं
विशेष योजनाएं
सूचकांक योजनाएं
क्षेत्र विशेष योजनाएं
 
 
ढांचे के आधार पर

  • ओपेन–एन्डेड कोष

एक ओपेन–एन्डेड कोष वह है जो पूरे वर्ष अभिदान के लिए खुला रहता है। इसकी कोई स्थाई परिपक्वता नही होती है। निवेशक इकाइयों को आसानी से कुल संपति मूल्य (एनएवी) संबंधित मूल्य पर खरीद या बेच सकते हैं। 

  • बंद–समाप्ति कोष

एक बंद–समाप्ति कोष में एक जमा परिपकव्ता अवधि होती है। जो सामान्यत: 3 से 15 साल तक की होती है। ये कोष अभिदान के लिए सिर्फ कुछ विशेष अवधि तक खुला रहता है। निवेशक इस योजना में प्रारंभिक पब्लिक इश्यू के समय निवेश कर सकते हैं। इसके बाद वो स्टाक एक्सचेंज में जहां ये सूचीकृत होते हैं में योजना की इकाइयों को खरीद या बेच सकते हैं।
 
 
निवेश लक्ष्य के अनुसार

  • वृद्धि कोष

इसका लक्ष्य मध्य अवधि से लंबी अवधि तक पूंजी का अभिमूल्यन है। इस तरह की योजनाएं सामान्यत: इक्विटी के संकोष में ज्यादातर निवेश की जाती हैं। वृद्धि कोष योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श होती हैं जो लंबा दृष्टिकोण रखत हैं और वृद्धि को लंबे समय के अनुसार देखते हैं।

  • आय कोष

इसका मकसद निवेशकों को नियिमत तथा स्थिर आय प्रदान करना होता है। इस तरह की योजनाओं में सामान्यत: आय स्थाई प्रतिभूतियों, बांड, कापोरेट ऋण पत्र तथा सरकारी प्रतिभूतियों में किया जाता है। आय कोष पूंजी स्थिरता और नियिमत आय के लिए आदर्श होता है।

  • संतुलन कोष

इसका मकसद वृद्धि तथा नियिमत आय दोनों है। यह योजना आवर्ती आधार पर अपनी आय को बांटता है। यह प्रतिभूति तथा आय आधारित प्रतिभूति में प्रस्ताव पत्र में दिए गए अनुपात के अनुसार निवेश करता है। य योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श होती है जिन्हें आय और मध्य वृद्धि दोनों की आवश्कता होती है।

  • मुद्रा बाजार कोष

इस मुद्रा बाजार कोष योजना का मकसद आसान तरलता, पूंजी का संरक्षण तथा मध्यम आय प्रदान करना होता है। ये योजनाएं सामान्यत: सुरिक्षत कम अवधि के साधनों जिनमें राजकोष बिल, जमा प्रमाणपत्र,व्यवसायिक पत्र,इंटर बैक कॉल मुद्रा में निवेश करती हैं। इन निवेश पर अदायगी बाजार में चल रहे ब्याज दर पर निर्भर करता है। ये योजना कार्पोरेट और उन निजी निवेशकों के लिए आदर्श है जो कम अवधि के लिए अतिरिक्त पूंजी को कहीं सुरिक्षत रखना चाहते हैं।
 
 
अन्य योजनाएं

  • कर बचत योजना

यह योजना भारत सरकार के कर बचत कानून जिसके तहत सरकार किसी ख्ास क्षेत्र में निवेश करने पर कर प्रोत्साहन देती है, के अंतर्गत कर बचत योजना में निवेश करती है। इक्विटी संबंधित बचत योजना (ईएसएलएल) तथा पेंशन योजना में निवेश किया जाता है।  इस पर भारत आयकर नियम 1961 की धारा 88 के अनुसार कर छूट दी जाती है।

  • सूचकांक योजनाएं

सूचकांक योजनाएं किसी विशेष सूचकांक जैसे बीएसई सेंसेक्स या एनएसई एस एंड पी सीएनएक्स 50 के प्रदर्शन को प्रतिरूपित करने की कोशिश करती हैं।

  • क्षेत्र के आधार पर योजनाएं

क्षेत्रीय कोष व हैं जो विशेष क्षेत्रों में अनन्य रूप से क्षेत्रों जिनमें एफएमसीजी,इंफोटेक,फार्मास्यूटिक्ल्स आदि में निवेश करते हैं। सामान्य इक्विटी योजनाओं की तुलना में ये योजनाएं ज्यादा खतरे वाली होती हैं क्योंकि इसमें कागजात का विविधकरण कम होता है। इसका मतलब सीमित क्षेत्रों/उद्योग से होता है।
 
 
ओपेन–एन्डेड तथा क्लोज एन्डेड योजनाओं में क्या फर्क है?
ओपेन–एन्डेड कोष यूनिट जारी कर सकती है या धन देकर योजना की जीवन अवधि में उन्हें बेच सकती हैं। क्लोज एन्डेड कोष बिना बोनस या अधिकार जारी किए नई यूनिट जारी नही कर सकती है। इसिलए इकाई की ओपेन–एन्डेड योजना में इकाई पूंजी दैनिक आधार पर बदलता है। इससे आगे नए निवेशक ओपेन–एन्डेड कोष योजना को म्यूचुअल फंड की कुल संपति मूल्य के आधार पर प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं। क्लोज एन्डेड योजना में नए निवेशक इकाइयों की खरीदारी गौण बाजार में ही कर सकते हैं।

 
 
योजना सूचना पत्र या विवरिणका क्या है?
ये वो पत्र है जिसे ओपेन–एन्डेड कोष या क्लोज एन्डेड कोष निवेशकों को प्रदान करना होता है। कोष कहता है कि निवेशकों को निवेश करने या पैसा भेजने से पहले इसे अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए। एक विवरिणका में निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं :

  • मानक फॉरमेट में शुल्क
  • निवेश का मकसद
  • कुछ वित्तीय आकंड़े
  • निवेश के तरीके
  • जोखिम और उनका विवरण
  • निवेश प्रबंधन तथा मुआवजा
  • लाभांश तथा पूंजी लाभ वितरण
  • अन्य सेवाएं

कुल संपति मूल्य (एनएवी) क्या है?
कुल संपति मूल्य कोष के बाजार मूल्य में निहत प्रतिभूतियां हैं। इसकी गणना कामकाज के दिन के अंत में किया जाता है। किसी ओपेन–एन्डेड कोष बिक्री तथा विक्रय आदेश किसी दिन के आखिर में व्यापारित कुल संपति मूल्य पर आधारित होता है। एनएवी प्रति इकाई को उनके बकाया यूनिटें को विभाजित करके तय किया जाता है। 

  संपति का कुल बाजार मूल्य - उत्तरदायित्व
एनएवी =  - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -
  यूनिट बकाया

 
लाभांश क्या है? 
एक म्यूचुअल फंड लाभांश या ब्याज अपने प्रतिभूतियों पर अर्जित करता है। निवेशकों को यह आय दी जाती है। लाभांश सिर्फ वर्ष में ज्यादातर ओपेन–एन्डेड कोष अतिरिक्त शेयर खरीदने के विकल्प प्रदान करते हैं। 
 
 
क्या म्यूचुअल फंड यूनिटों में निवेश सुरिक्षत है?
कोई भी स्टाक बाजार में निवेश सुरिक्षत करार नही दिया जा सकता। ये प्रकृति से ही खतरे वाले होते हैं, हालांकि विभिन्न कोषों के अलग–अलग संकट होते हैं जो मकसद में निहित हैं। वैसे कोष जो स्वंय को कम संकट वाले वर्ग में रखते हैं सामान्यत: निवेश ऋण में करते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से कम संकट वाला होता है। फिर भी जैसा कि म्यूचुअल फंड को विशेषज्ञों कोष प्रबंधकों की सेवा प्राप्त है इसिलए ये स्टाक बाजार में सीधे निवेश से ज्यादा सुरिक्षत होते हैं।
 
 
म्यूचुअल फंड में कौन–कौन से संकट निहित हैं?
इक्विटी कोष के बाजार के संकट के सामने होते हैं। इसका अर्थ यह है कि स्टाक के मूल्य जिसमें कोष निवेश किया गया है घट जाए। यकीनन मूल्य बढ़ सकते हैं जिससे कोष में लाभ आय की संभावना बनती है। ऋण कोषों के दो मुख्य संकट हैं–साख का संकट तथा ब्याज दर का संकट। साख का संकट इस संभावना की ओर इशारा करता है कि जिस समूह ने बांड या ऋण पत्र जारी किए हैं, जिसमें कोष को निवेश किया गया है, ब्याज या मूल अदायगी के लिए दोषी हो। ऋण कोष प्रबंधक इसकी देखभाल उन बांड्स में निवेश करके करते हैं जिनकी साख दर अच्छी हो।
 
ब्याज दर का संकट उस संभावना से संबंधित होता है कि बांड के मूल्य जिसमें कोष को निवेश किया गया है वो नीचे जा सकता है क्योंकि अर्थव्यवस्था में ब्याज दर ऊपर चले जाते हैं। सामान्य तौर पर यह याद रखना उपयोगी है कि बांड क मूल्य उस समय ऊपर जाता है जब ब्याज दर गिरता है तथा तब नीचे आता है जब ब्याज दर ऊपर जा रहा हो।
 
 
म्यूचुअल फंड के कौन कौन से फायदे हैं?

  • आपका पैसा अनुभवी और कुशल प्रबंधकों के द्वारा प्रबंधित होता है।
  • आपका निवेश अपने आप बड़ी संख्या में कंपनी समूहों तथा उघोगों में विभक्त हो जाता है जिससे संकट के तत्व कम हो जाते हैं।
  • आपका पैसा बहुत तरल हो जाता है विशेषकर ओपेन–एन्डेड कोष में।
  • उच्च मध्यम से दीर्घ अवधि में उच्चतर रिटर्न बड़े स्तर पर देने की संभावना प्रतिभूतियों में दुसरों के मुकाबले बेहतर होता है।
  • व्यक्तिगत प्रतिभूतियों में शोध लागत तथा प्रत्यक्ष निवेश एक बड़े संकोष पर फैला होता है तथा हजारों निवेशक व्यक्तिगत फायदे को कम करते हैं।
  • म्यूचुअल फंड के संचालन में पारदिर्शता के उच्चतम स्तर की वजह से आप निवेश के फैसले ज्यादा सूचना के आधार पर ले सकते हैं।
  • आपके पास आपकी आवश्कता से मेल खाने वाली योजनाओं को चुनने का मौका है।
  • निवेशक को सुरिक्षत करने की दिशा में कई उपाय इस उद्योग को चला रहे हैं।

क्या म्यूचुअल फंड रिटर्न सुनिश्चित करते हैं?
कुछ म्यूचुअल फंड सुनिश्चित रिटर्न योजना लाए हैं जो एक निश्चित सालाना रिटर्न क गारंटी देते हैं। वर्तमान में बहुत कम कोष हैं जो रिटर्न सुनिश्चित करते हैं क्योंकि व समझ गए हैं कि अस्थिर बाजार में रिटर्न सुनिश्चित करना संभव नही है।
 
वर्तमान में फिलहाल कोई सुनिश्चित रिटर्न योजना नही है। सेबी के विनियमन योजना रिटर्न की गारांटी तभी स्वीकार करती है जब –
ए) वो रिटर्न जो संपति प्रबंधन समूह या प्रायोजक से पूरी तरह गारंटी वाली होती है
बी) एक कथन में उस व्यक्ति के नाम के संकेत दिए जाएंगें जो रिटर्न की गारंटी देगा। य योजना सूचना पत्र में लिखा जाना चाहिए।
सी) योजना सूचना पत्र में गारंटी किए प्रकार दी जाएगी ये लिखा होना चाहिए।
 
पूंजी सुरक्षा वाली योजनांए पारस्पिरक कोषों द्वारा चलाई गई हैं। सेबी विनियमन के अनुसार एक क्लोज एन्डेड पूंजी सुरक्षा वाली योजना एक पंजीकृत साख क्रंमाक साख एजेंसी द्वारा योजना की इकाइयों के भाव की शुरुआत से हो सकता है। इस सोच से कि कागजात के संरचना की क्षमता से निवेशित पूंजी की सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है।
 
 
म्यूचुअल फंड में आप पैसा कैसे कमाएंगें?
म्यूचुअल फंड में आप निम्नलिखित तीन तरीकों से पैसा बना सकते हैं।

  • पहला आप म्यूचुअल फंड से लाभांश अर्जित कर सकते हैं अधिकतर ऋण कोष प्रत्येक छह महीने पर लाभांश विकल्प के अनुसार लाभांश घोषित करते हैं। अगर आप लाभांश नही चाहते हैं, तो आप जमा करने वाले विकल्प को चुन सकते हैं। जब लाभांश घोषित होता है तब इकाइयों के एनएवी गिर जाते हैं क्योंकि लाभांश की अदायगी इकाई के मूल्य के अनुसार किया जाता है।
     
  • आप म्यूचुअल फंड के इकाइयों को क्रय मूल्य से ऊंचे मूल्य पर बेचकर लाभ अर्जित कर सकते हैं। यह पूंजी लाभ है। (अगर आप इकाइयों को कम मूल्य में बेचते हैं तो ये पूंजी हानि है)
     
  • आपके पास इकाइयां हैं उनके मूल्य बढ़ सकते हैं। यह तुरंत पता नहीं चलने वाला पूंजी लाभ है। लाभांश और पूंजी लाभों को अलग–अलग समझा जाता है।

म्यूचुअल फंड में निवेश से क्या क्या फायदे हैं?
10000 रुपये के योगदान पर 20 प्रतिशत छूट–ईएलएसएस (इ޵क्विटी से जुड़ी बचत योजनाओं) के अंतर्गत। कर लाभ की आगे व्याख्या की गई है।
 
 
किसे म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए?
म्यूचुअल फंड हर प्रकार के निवेश मकसद को प्राप्त कर सकता है। युवा निवेशक जो दीर्घ अवधि में पूंजी के समग्र वृ޵द्धि का मकसद रखते हैं उनके लिए वृ޵द्धि योजना एक आदर्श विकल्प है।
 
वो पुराने निवेशक जो संकट प्रतिकूल होते हैं और स्थिर आय चाहते हैं, वे मध्यम अवधि की आय योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। (इसका अर्थ उस कोष से है जिसका निवेश ऋण के साधनों में किया जाता है)। मध्यम आयु के निवेशक आय कोष और वृ޵द्धि के कोष के बीच अपनी बचत बांटकर आय तथा पूंजी वृ޵द्धि प्राप्त कर सकते हैं। वो निवेशक जो नियिमत बचत का लाभ चाहते हैं,छोटी राशि हर महीने बचाते हैं वो व्यविस्थत निवेश योजना का उपयोग कर सकते हैं। यह देखते हुए कि म्यूचुअल फंड योजना केवल पूंजी बाजार में निवेश की जाती है।
 
 
क्या म्यूचुअल फंड में छोटे निवेशकों द्वारा निवेश करना सही है?
म्यूचुअल फंड छोटे निवेशकों के लिए होते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि पूंजी बाजार में सफल निवेश के लिए सावधानीपूर्वक विश्लेषण जरूरी होता है जो एक छोटे निवेशक के लिए संभव नही है। म्यूचुअल फंड अक्सर विश्लेषण करने में सक्षम होते है और सुरिक्षत ޵रिटर्न दे सकते है
 
 
 
निवेशक शिक्षा

परिचय
निवेशकों के पास विभिन्न क्षेत्र होते हैं। म्यूचुअल फंड भी निवेशकों को अच्छे निवेश के अवसर प्रदान करते हैं। सभी अन्य निवेश की तरहइसमें भी कुछ संकटें निहत होती हैं। निवेशक को संकट तथा अनुमानित आय को विभिन्न साधनों पर कर व्यवस्था के अनुसार निवेश के फैसलों की तुलना करनी चाहिए। निवेशक विशेषज्ञों या सलाहकारों में इसके जानकार दलाल और म्यूचुअल फंड योजना के वितरक शामिल होते हैंइनसे निवेश का फैसला लेते समय सलाह लेनी चाहिए।
म्यूचुअल फंड के संचालन के प्रति निवेशकों को जागरूक करने के मकसद से प्रश्न–उत्तर ढांचे के अनुसार सूचना प्रदान करने की कोशिश की जा सकती है इनसे निवेशकों को निवेश के फैसले लेने में सहायता मिल सकती है।
 
 
म्यूचुअल फंड क्या हैं?
म्यूचुअल फंड एक व्यवस्था है जिसके तहत निवेशकों को यूनिट जारी करके तथा प्रस्तावित पत्र में दिए गए मकसद के अनुसार प्रतिभूतियों में कोष को निवेश करके शोध को जमा किया जाता है।

सुरक्षा में निवेश बड़े स्तर पर एक दूसरे उद्योग तथा क्षेत्र में फैल चुका है जिससे कि संकट कम हो गया है। विभिन्नता खतरे/संकट को कम करती है क्योंकि सभी स्टाक एक साथ एक ही समय में एक ही दिशा में तथा एक ही अनुपात में नही भाग सकते। म्यूचुअल फंड निवेशकों के द्वारा लगाए गए पैसे के परिमाण के अनुसार यूनिट जारी करता है। म्यूचुअल फंड के निवेशकों को यूनिटधारक कहा जाता है।
 
लाभ या हानि उनके निवेश के अनुसार निवेशकों द्वारा बांट लिया जाता है। म्यूचुअल फंड साधारणत: बहुत सी योजनाओं के साथ आता है। अलग–अलग मकसद के साथ जिसकी शुरुआत समय–समय पर की जाती है। जनता से कोष एकित्रत करने से पहले म्यूचुअल फंड को भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड के द्वारा पंजीकरण की आवश्कयता होती है जो प्रतिभूति बाजार का संचालन करता है।
 
 
म्यूचुअल फंड का भारत में क्या इतिहास रहा है तथा म्यूचुअल फंड में सेबी की क्या भूमिका रही है?
यू޵निट ट्रस्ट आफ इं޵डिया की शुरुआत 1963 में हुई। यह भारत का पहला म्यूचुअल फंड है। 1990 की दशक की शुरुआत में सरकार ने सार्वजिनक क्षेत्र के बैंकों तथा संस्थानों को म्यूचुअल फंड स्थापित करने की मंजूरी दी। 1992में भारतीय प्रतिभूति विनियमन बोर्ड अधिनियम पास किया गया। सेबी के मकसद हैं–प्रतिभूति में निवेशकों के हित की रक्षा करना तथा प्रतिभूति बाजार के विकास को प्रोत्साहन देना तथा उनका संचालन करना। जहां तक म्यूचुअल फंड का प्रश्न है तो सेबी इसकी नीतियां बनाता है। निवेशकों के हित के लिए  सेबी ने म्यूचुअल फंड के संचालन के लिए 1993 में नियामकों की घोषणा की। इसके बाद निजी क्षेत्र के संस्थानों को म्यूचुअल फंड को प्रयोजित कर पूंजी बाजार में आने की अनुमित दे दी गई। 1996 में इन नियामकों का संशोधन किया गया।  इसके बाद इसमें समय–समय पर संशोधन किया गया। सेबी ने भी निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियमावली जारी किए हैं।
 
सभी म्यूचुअल फंड चाहे वो सार्वजिनक क्षेत्र के हों या निजी क्षेत्र के हों, इनका संचालन इन्हीं नियामकों के द्वारा किया जाता है। इन म्यूचुअल फंड के लिए अलग से नियामक की आवश्कता नही होती। इनका संचालन सेबी की निगरानी  में किया जाता है। इन स्वामित्वों द्वारा प्रयोजित म्यूचुअल फंड की योजनाओं में खतरा हमेशा बना रहता है।
 
 
म्यूचुअल फंड की स्थापना कैसे की जाती है?
एक म्यूचुअल फंड एक न्यास के रूप में स्थापित किया जाता है जिसके पास प्रायोजक, न्यासी, संपति प्रबंधन समूह (एएमसी) तथा निगरानी रखने वाले होते हैं। न्यास की स्थापना एक या एक से अधिक प्रायोजकों द्वारा किया जाता है जो समूह के प्रायोजक की तरह होते हैं। म्यूचुअल फंड के न्यासी संपति को यूनिटधारकों के लाभ के लिए अपने पास रखते हैं। सेबी द्वारा मंजूर की गई एएमसी कोष का प्रबंधन विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश के द्वारा किया जाता है। संरक्षक जो सेबी द्वारा पंजीकृत होता है,कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रतिभूतियों को अपने पास रखता है। एएमसी पर अधिग्रहण तथा निवेश की शक्तियां न्यासी के पास होती हैं। वो सेबी नियामकों के तहत म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन तथा उनके आज्ञापालन पर नज़र रखते हैं।
 
सेबी नियामकों में न्यासी समूह के निदेशकों या न्यास के निदेशकों के दो तिहाई निदेशक स्वत्रंत होने चाहिए। इसका मतलब ये है कि वो प्रायोजक से संबंधित नही होने चाहिए। एएमसी के 50 प्रतिशत निदेशक स्वत्रंत होने चाहिए। सभी म्यूचुअल फंड की शुरुआत सेबी में पंजीकरण से होती है।
 
 
एक योजना का कुल संपति मूल्य क्या है?
म्यूचुअल फंड के किसी विशेष योजना के प्रदर्शन को कुल संपति मूल्य द्वारा दिखाया जाता है। प्रतिभूति बाजार के निवेशकों से एकित्रत पैसों का निवेश म्यूचुअल फंड में किया जाता है। सामान्यत: योजना द्वारा रखे गए प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य कुल संपति मूल्य है। जबिक प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य दिन ब दिन बदलता है। एनएवी भी दैनिक आधार पर बदलता है। प्रति इकाई एनएवी मूल्य एक योजना में प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य योजना के इकाइयों की कुल संख्या को किसी विशेष तारीख में विभाजित किया जाता है। उदाहरण के लिए अगर एक म्यूचुअल फंड योजना के प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य 200 लाख रुपये है तथा म्यूचुअल फंड ने 10 रुपये मूल्य वाली 10 लाख  इकाई निवेशक के लिए ज़ारी किए गए हैं तब कोष की एनएवी प्रति इकाई 20 रुपये होगी। एनएवी को नियिमत आधार पर म्यूचुअल फंड द्वारा घोषित करने की आवश्कयता होती है। य दैनिक हो या साप्ताहिक, यह योजना पर निर्भर करता है।
 
 
विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड क्या हैं?
एक म्यूचुअल फंड को परिपक्वता के आधार पर ओपेन–एन्डेड योजना या क्लोज एन्डेड योजना के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

ओपेन–एन्डेड कोष/योजना
एक ओपेन–एन्डेड कोष या योजना नियिमत आधार पर शुल्कीकरण या पुन:क्रय के लिए उपलब्ध होती है। इस योजना की स्थाई परिपक्वता अवधि नही होती है। निवेशक आसानी से कुल संपति मूल्य जो हर दिन घोषित किया जाता है पर खरीद बिक्री कर सकते हैं। ओपेन–एन्डेड योजना की मुख्य विशेषता उसकी तरलता है।

क्लोज एन्डेड कोष /योजना
एक क्लोज एन्डेड कोष /योजना की बढ़ाई गई परिपक्वता अवधि 5 से 7 वर्ष होती है। ये कोष किसी विशेष अवधि के दौरान अंशदान के लिए उपलब्ध रहता है। निवेशक सार्वजिनक इश्यू की शुरुआत में निवेश कर सकते हैं। उसके बाद वे स्टाक एक्सचेंज में जहां यूनिट सूचित होती हैं इकाइयों को खरीद बेच सकते हैं। निवेशकों को बाहर निकलने के लिए रास्ता देने के लिए क्लोज एन्डेड कोष एनएवी से सबंधित मूल्य पर म्यूचुअल फंड के इकाइयों को वापस बेचने का अवसर आवर्ती पुर्नखरीद द्वारा देता है। सेबी नियामक बताता है कि निवेशकों को प्रदान किए गए बाहर आने के दो रास्तों में एक तो पुन:क्रय की सुविधा है और दूसरा स्टाक एक्सचेंज में सूचित करके किया जाता है। ऐसे म्यूचुअल फंड एनएवी को सामान्यत: साप्ताहिक आधार पर घोषित करते हैं।

निवेश उद्देश्यों के आधार पर योजना
एक योजना का वर्गीकरण, वृद्धि योजना, आय योजना या संतुलन योजना को निवेश उद्देश्यों के आधार पर कर सकते हैं। ऐसी योजनाओं को ओपेन–एन्डेड योजना या क्लोज एन्डेड योजना की तरह वर्णित कर सकते हैं। ऐसी योजनाएं मुख्यत: निम्नलिखित रूप से वर्गीकृत की जा सकती है।

वृद्धि/इ޵क्विटी संबंधी योजना
वृद्धि/इ޵क्विटी संबंधी योजना का मकसद मध्यम से दीर्घ अवधि में पूंजी का मूल्यांकन प्रदान करना है। इस तरह की योजनाएं अपने संकोष का बड़ा हिस्सा सामान्यत: इ޵क्विटी में निवेश करती हैं। ये योजनाएं निवेशक को लाभांश विकल्प, पूंजी मूल्याकन जैसे विभिन्न विकल्प प्रदान करते हैं और निवेशक अपनी पसंद के अनुसार विकल्प चुन सकता है। निवेशक को ये विकल्व प्रार्थना पत्र में बताने होते हैं। परास्पिरक कोष में निवेश के बाद विकल्प बदलने की मंजूरी भी दी जाती है। वृद्धि योजनाएं उन निवेशकों के लिए अच्छा है, जो दीर्घ दृष्टिकोण रखते हैं और एक अवधि के बाद मूल्याकंन चाहते हैं।

आय/ऋणसंबंधी योजनाएं
इस आय योजना का मकसद निवेशकों को नियिमत तथा स्थिर आय प्रदान करना होता है।
इसका मकसद निवेशकों को नियिमत तथा स्थिर आय प्रदान करना होता है। इस तरह की योजनाओं में सामान्यत: आय स्थाई प्रतिभूतियों, बांड, कापोरेट ऋण पत्र तथा सरकारी प्रतिभूतियों में किया जाता है। आय कोष पूंजी स्थिरता और नियिमत आय के लिए आदर्श होता है। ये कोष इ޵क्विटी बाजार के उतार चढ़ाव से प्रभावित नही होते। हालांकि ऐसे कोष में पूंजी मूल्यांकन के अवसर सीमित होते हैं। देश के ब्याज दरों में परिवर्तन से ऐसे कोष के एनएवी प्रभावित होते हैं। अगर ब्याज दर कम होता है तो छोटी अवधि में इस तरह के कोष का एनएवी बढ़ने की संभावना होती है। हालांकि दीर्घ अवधि में निवेशकों पर इन उतार -

चढ़ाव का प्रभाव ज्यादा नहीं होता।

संतुलन कोष
इसका मकसद वृद्धि तथा नियिमत आय दोनों है। यह योजना आवर्ती आधार पर अपनी आय को बांटता है और प्रतिभूति तथा आय आधारित प्रतिभूति में प्रस्ताव पत्र में दिए गए अनुपात के अनुसार निवेश करता है। ये योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श होती है जिन्हें आय और मध्य वृद्धि दोनों की आवश्कता होती है। ये 40 से 60 प्रतिशत इ޵क्विटी तथा ऋण पत्र में निवेश करते हैं। स्टाक बाजार में शेयर के मूल्य में उतार–चढ़ाव से ये कोष प्रभावित होता है। लेकिन शुद्ध इ޵क्विटी कोष की तुलना में ऐसे कोष एनएवी के लिए कम खतरेवाले होते हैं।


मुद्रा बाजार या तरलता कोष
इस मुद्रा बाजार कोष योजना का मकसद आसान तरलता, पूंजी का संरक्षण तथा मध्यम आय प्रदान करना होता है। ये योजनाएं सामान्यत: सुरिक्षत कम अवधि के साधनों जिनमें राजकोष बिल, जमा प्रमाणपत्र, व्यवसायिक पत्र, इंटर बैक कॉल मुद्रा में निवेश करती हैं। इन निवेश पर अदायगी बाजार में चल रहे ब्याज दर पर निर्भर करता है। ये योजना कार्पोरेट और उन निजी निवेशकों के लिए आदर्श है जो कम अवधि के लिए अतिरिक्त पूंजी को कहीं सुरिक्षत रखना चाहते हैं।

गिल्ट कोष
ये कोष विशुद्ध तौर पर सरकारी प्रतिभूति में निवेश करते हैं। सरकारी प्रतिभूति में खतरा कम होता है। आय/ऋण पत्र की योजना जैसे ही अन्य आिर्थक कारकों तथा ब्याज दर में परिवर्तन का असर सभी योजनाओं के एनएवी पर पड़ता है।

सूचकांक कोष
सूचकांक कोष बीएसई संवेदी सूचकांक, एस एंड पी सीएनएक्स जैसे विशेष सूचकांक के कागजात का प्रतिरूप करने की कोशिश करता है। ये योजनाएं प्रतिभूति में सूचकांक में दिए गए भार के अनुसार निवेश करती हैं। इस तरह की योजना में एनएवी सूचकांक में उतार–चढ़ाव के अनुसार चढ़ता–उतरता है। कुछ कारक जैसे पीछा करने में हुई गलितयों को उसी प्रितात में बदलता है। इस बारे में जरूरी घोषणाएं म्यूचुअल फंड योजना के प्रस्ताव पत्र में कर दी जाती हैं।
 
कुछ सूचकांक कोष ऐसे भी है जिसकी शुरुआत म्यूचुअल फंड करता है और जिसका व्यापार स्टाक एक्सचेंज पर होता है।
 
 
क्षेत्र विशेष कोष/योजनाएं क्या हैं?
ये कोष या योजना उन्हीं प्रतिभूतियों में निवेश करता है जिनके क्षेत्र या उद्योग का जिक्र प्रस्तावित पत्र में पहले से होता है। जैसे फार्मास्यूटिकल, सॉफ्टवेयर, एएमसीजी, पेट्रोलियम स्टाक आदि। इस कोष में ޵रिटर्न संबंधित क्षेत्र या उद्योग के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। जबिक ये कोष ज्यादा ޵रिटर्न दे सकते हैं लेकिन विभिन्न कोषों में किए गए निवेश से ज्यादा खतरे वाले होते हैं। निवेशकों को उन क्षेत्रों या उद्योगों पर नजर रखनी पड़ती है और सही समय पर बाहर भी निकलना पड़ता है। वे किसी विशेषज्ञ की सलाह भी ले सकते हैं।
 
 
कर बचत योजनाएं क्या है?
ये योजनाएं निवेशकों को आयकर अधिनियम 1961 के विशेष प्रस्तावों के अनुसार कर में छूट का अवसर देती है क्योंकि सरकार विशेष क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन देती है। जैसे इ޵क्विटी से जुड़ी बचत योजनाएं (ईएलएसएस)म्यूचुअल फंड द्वारा शुरु की गई पेंशन योजनाएं वृद्धि संबंधी तथा पूर्व निर्धारित तौर पर इ޵क्विटी में निवेश की जाती हैं इसमें वृद्धि के अवसर और खतरे इ޵क्विटी संबंधित योजना की तरह होती हैं।
 
 
म्यूचुअल फंड कितने भार की मांग कर सकता है?
सेबी नियामक के अनुसार म्यूचुअल फंड योजना शुरुआती भार का वहन नहीकर सकता। एक कोष से बाहर निकलते समय एनएवी के प्रतिशत के अनुसार कोष खर्च की मांग कर सकता है। इसका मतलब ये है कि कोष की प्रत्येक इकाई बेचने पर एक खर्च की अदायगी करनी पड़ती है। इस खर्च का इस्तेमाल म्यूचुअल फंड मार्के޵टिंग और ޵वितरण में होता है। मान लीजिए कि एनएवी प्रति इकाई 10 रुपये है अगर बाहर निकलने वाला खर्च 1 प्रतिशत है तब निवेशक इकाई को पुन:क्रय के लिए जो प्रस्ताव देता है उसमें से म्यूचुअल फंड केवल 9.90 रुपया पाएगा। निवेशक को यह भार यह देखते हुए उठाना चाहिए कि बाजार में निवेश करते समय इसका असर ޵रिटर्न पर पड़ सकता है। हालांकि निवेशक को म्यूचुअल फंड के पिछले रिकार्ड का प्रदर्शन तथा सेवाओं के स्तर का ध्यान रखना चाहिए, ये बहुत जरूरी है। सक्षम कोष भार के बावजूद उच्च ޵रिटर्न दे सकता है। वितरकों की दस्तुरी निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से वितरकों को देना होता है। इस आधार पर कि वो इसके विभिन्न पहलुओं जिसमें वितरक द्वारा दी जा रही सेवाओं का मूल्याकंन करना होता है। वह निवेशक जो म्यूचुअल फंड में प्रत्यक्ष प्रार्थनापत्र डालते हैं उन्हें प्रवेश भार से मुक्त रखा गया है। निकासी भार या सीडीएस खर्च जो निवेशक वहन करता है और जो अधिकतम 1 प्रतिशत धन देकर मुक्त करने का कार्य एक अलग खाते से किया जा सकता है जिसका उपयोग एएमसी वितरक को दस्तुरी अदायगी तथा अन्य विपणन तथा विक्रय खर्च के लिए कर सकता है। किसी भी तरह का बकाया योजना में तुरंत जमा कर देना चाहिए।
 
 
क्या एक म्यूचुअल फंड प्रस्तावित पत्र में दिए गए भार से ज्यादा ताजा भार या भार में वृद्धि कर सकता है?
बिना किसी भेदभाव के किसी भी विशेष समूह वाले ईकाईधारकों के म्यूचुअल फंड में 7 प्रतिशत की निदृष्ट सीमा के अंदर भार बढ़ा सकता है। इससे आगे किसी भी तरह का परिवर्तन बाद में निवेशकों को विपरीत रूप से प्रभावित नही करना चाहिए। यूनिटधारकों के बीच नाम लेखन के आधार पर निकास भार खर्च लेते समय किसी भी तरह का भेदभाव नही किया जा सकता। एएमसी बोनस इकाइयों पर प्रवेश या निकासी भार नहीं ले सकता है और लाभांश के बाद पुन:निवेश करने के लिए दी गई इकाइयों पर भी योजना सूचना पत्र में दिए गए स्तर से ज्यादा भार में किसी भी तरह का परिवर्तन निवेश करने वालों पर म्यूचुअल फंड भार नही बढ़ा सकता। ताजा भार लागू करने या मौजूदा भार को बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड को एडेंडम जारी करना पड़ता है और उसे वेबसाइट/वित्तीय केद्रों पर लगाना पड़ता है ताकि नए निवेशक निवेश के भार से अवगत हों।
 
 
दुबारा खरीदने या धन देकर मुक्त करने वाले मूल्य क्या हैं?
दुबारा खरीदने या धन देकर मुक्त करने वाले मूल्य एनएवी हैं जिस पर ओपेन–एन्डेड योजना खरीदी जाती है या इकाइयों को धन देकर छोड़ा जाता है। इसमें निकास भार अगर उचित हो तो शामिल हो सकता है।
 
 
सुनिश्चित ޵रिटर्न योजना क्या है?
सुनिश्चित ޵रिटर्न योजना वो योजनाएं हैं जो योजना के प्रदर्शन के आधार पर अलग–अलग यूनिटधारकों के लिए विशेष ޵रिटर्न सुनिश्चित करती है।
 
एक योजना कभी भी ޵रिटर्न का वचन नही दे सकती जब तक कि उसे किसी प्रायोजक या एएमसी द्वारा गारंटी नही मिल जाती तथा इसे प्रस्तावित पत्र में घोषित करने की आवश्यकता होती है।
 
 
क्या म्यूचुअल फंड संपति के बंटवारे द्वारा निवेशकों के कोष को परिवर्तित कर सकता है?
बाजार के तौर तरीकों को देखते हुए कोई भी मितव्ययी कोष प्रबंधक संपति के बंटवारे को परिवर्तित कर सकता है इसका अर्थ ये है कि वो इ޵क्विटी या ऋणपत्र में प्रस्तावित पत्र में घोषित प्रतिशत की तुलना में कोष के निम्नतर या उच्चतर प्रतिशत निवेश कर सकता है। ये छोटी अवधि के लिए सुरक्षात्मक दृ޵ष्टिकोण से किया जा सकता है ताकि एनएवी को बचाया जा सके। इसिलए संपति के बंटवारे में निवेशकों के हित को देखते हुए कोष प्रबंधकों को थोड़ी छूट दी गई है। अगर म्यूचुअल फंड चाहता है कि वो स्थाई तौर पर संपति के बंटवारे को परिवर्तित करे तो उन्हें यूनिटधारकों को इसकी सूचना देनी पड़ती है तथा उन्हें वर्तमान एनएवी पर बिना कोई भार अदा किए हुए योजना से निकासी के विकल्प देने होगें।
 
 
म्यूचुअल फंड योजना में कैसे निवेश किया जाता है?
म्यूचुअल फंड योजना सामान्त: नई योजना शुरु होने वाले दिन समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित करके सामने आता है। निवेशक राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में फैले म्यूचुअल फंड के एजेंटों तथा वितरकों से जरूरी सूचना तथा प्रार्थना पत्र के लिए संपर्क कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड के पत्र को वे एजेंटों और वितरकों जो ऐसी सेवाएं प्रदान करते हैं के पास जमा कर सकते हैं। आजकल डाक खाने तथा बैंक भी म्यूचुअल फंड की इकाइयों का वितरण करते हैं। हालांकि निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि बैंकों तथा डाक खानों द्वारा वितिरत म्यूचुअल फंड योजनाएं उनकी अपनी नही होती और इसके लिए उनसे ޵रिटर्न की उम्मीद नही करनी चाहिए। डाक खाने और बैंक की भूमिका सिर्फ म्यूचुअल फंड योजना को निवेशकों तक पहुंचाना है।
 
किसी खास योजना में दलालों या वितरकों द्वारा दिए गए उपहार/दस्तुरी की वजह से निवेश का फैसला नही लेना चाहिए। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड योजना के पिछले रिकार्ड पर विचार कर उद्देश्यों के आधार पर फैसला करना चाहिए।
 
 
क्या अप्रवासी भारतीय भी म्यूचुअल फंड योजना में निवेश कर सकते हैं?
हां, अप्रवासी भारतीय भी म्यूचुअल फंड योजना में निवेश कर सकते हैं इसके लिए जरूरी सूचना प्रस्ताव पत्र में दिया जाता है।
 
 
ऋण या इ޵क्विटी से संबंधित योजना में कितना निवेश किया जाना चाहिए?
एक निवेशक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खतरा उठाने की उसकी कितनी क्षमता है। इसके अलावा उम्र कारक, वित्तीय स्थिति, निवेश क्षैतिज आदि का ध्यान रखना चाहिए। जैसा कि हमने पहले से लिखा है कि इयोजना के विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों में निवेश޵ किया जाता है जो प्रस्ताव पत्र में दिया गया होता है प्रस्ताव पत्र खतरों के बारे में बताता है। निवेशक फैसला लेने से पहले वित्तीय सलाहकारों से संपर्क कर सकते हैं। इस सबंध में निवेशक एजेंट या वितरक की मदद भी ले सकते हैं।
 
 
म्यूचुअल फंड योजना का प्रार्थना पत्र किस तरह भरा जाता है?
एक निवेशक को अपना नाम, पता इच्छित इकाइयों की संख्या तथा दूसरे अन्य सूचनाएं जैसा कि प्रार्थना पत्र में मांगा गया हो साफ–साफ लिखना चाहिए। उसे अपने खाते की संख्या भी देनी चाहिए ताकि बाद में लाभांश या पुन:क्रय के लिए म्यूचुअल फंड योजना द्वारा जारी किए गए चेक या ड्राफ्ट के नकदीकरण में किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके। पता, बैक खाते इत्यादि के बारे में किसी भी तरह के परिवर्तन की सूचना तुरंत दे दी जानी चाहिए।
 
 
एक निवेशक को प्रस्तावित पत्र या योजना सूचना पत्र में किन बातों को ख्याल रखना चाहिए?
एक संक्षेपित प्रस्ताव पत्र जिसमें कई प्रकार की सूचनाएं होती हैं उन्हें म्यूचुअल फंड योजना के निवेशकों को देनी जरूरी होती है। एक योजना में शामिल होने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्ताव पत्र का आंतिरक हिस्सा होता है। सेबी से प्रस्तावित पत्र में निम्नतम घोषणाएं प्रस्तावित होती हैं। एक निवेशक जो योजना में निवेश कर रहा है उसे प्रस्ताव पत्र को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए। योजना के मुख्य रूप वाले भाग, संकट के कारकों, शुरुआती इश्यू पर होने वाले खर्च तथा योजना में होने वाले आवर्ती खर्च प्रवेश तथा निकासी भार, प्रायोजक का पिछला रिकार्ड, शैक्षणिक योग्यताएं तथा अहम अधिकारियों के कार्य अनुभव जिनमें कोष प्रबंधक शामिल हैं, इस म्यूचुअल फंड योजना द्वारा शुरु की गई अन्य योजनाओं का प्रदर्शन, विचाराधीन मामले तथा उस पर हुए जुर्माने आदि पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
 
 
निवेशकों के म्यूचुअल फंड में निवेश के बाद उन्हें कब प्रमाणपत्र या खाते का विवरण (एसओए) दिया जाता है?
ओपेन–एन्डेड योजना के तहत, योजना के शुरुआती प्रस्ताव के बंद होने के 30 दिनों के अंदर एसओए म्यूचुअल फंड द्वारा जारी किया जाता है। ओपेन–एन्डेड योजना के तहत, निवेशकों को दोनों में से कोई एक या तो डीमेट खाता कथन या फिर इकाई प्रमाणपत्र जैसा कि दोनों ही स्टॉक विनिमय में काम करते हैं प्राप्त करते हैं। उन इकाईघारकों के लिए जिन्हें ई–मेल पता प्रदान किया गया है, एएमसी ई–मेल द्वारा एसओए भेजेगा। यूनिटधारक एएमसी या आरएण्डटी को लिखित बुलावे द्वारा प्रत्यक्ष खाता कथन के लिए निवेदन कर सकते हैं। एसआईपी या एसटीआरआईपी आदान–प्रदान के लिए एसओए हर तीन माह में एक बार भेजा जाता हैं।
 
 
स्टॉक बाजार से खरीदारी के बाद ओपेन–एन्डेड योजना के तहत, ईकाई के स्थानांतरण में कितना समय लगता है?
सेबी नियमन के अनुसार, म्यूचुअल फंड के साथ प्रमाणपत्र के वासकरण की तिथि के 30 दिनों के अंदर इकाइयों का स्थानांतरण हो जाना चाहिए।
 
 
लाभांश/पुन:क्रय की प्रक्रिया को एक यूनिटधारक के रूप में प्राप्त करने के लिए कितना समय लगेगा?
लाभांश पत्र की घोषणा के बाद एक म्यूचुअल फंड को लाभांश वारंट 30 दिनों के अंदर भेज देना होता है तथा दुबारा कीमत देकर खरीदने की प्रक्रिया के लिए यूनिटधारकों द्वारा दिए गए निवेदन तिथि के 10 काम करने वाले दिनों के अंदर ही पुन:क्रय का कार्य हो जाना चाहिए।
 
दिए गए समय के दौरान यदि पुन:क्रय का काम में विफलता होती है तो सेबी द्वारा निर्दिष्ट किया गया है कि सम्पित प्रबंधक कम्पनी ޵जिम्मेदार होगी समय–समय पर ब्याज अदायगी के लिए (वर्तमान 15 प्रतिशत पर)।
 
 
क्या एक म्यूचुअल फंड एक बार निर्दिष्ट की गई योजना सूचना पत्र के प्रकृति में बदलाव ला सकती है?
जी हां, हालांकि योजना की प्रकृति तथा शर्तों में बदलाव नहीं होता, उन्हें योजना के मौलिक विशेषताओं के तौर पर जाना जाता है जैसे संरचना, निवेश का चलन आदि में तब तक चलाया जा सकता है जब तक लिखित सम्प्रेषण प्रत्येक यूनिटधारक को भेजा नहीं जाता तथा राष्ट्रीय स्तर के अंग्रेजी समाचार पत्र के जो विज्ञापन में जो छपा हो तथा समाचार पत्र जहां म्यूचुअल फंड का मुख्यालय हो, वहां की क्षेत्रीय भाषा के समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया हो। इकाई धारकों को अधिकार है कि वो बिना किसी निकासी भार दिए वर्तमान एनएवी के आधार पर योजना से बाहर हो जाएं अगर वो योजना में नही बने रहना चाहते। प्रायोजक के बदलने की सूरत में म्यूचुअल फंड को यही तरीका अपनाना पड़ता है जब वो क्लोज एन्डेड योजना को ओपेन–एन्डेड योजना में परिवर्तित करते हैं।
 
 
अगर म्यूचुअल फंड योजना में कोई परिवर्तन होता है तो इस परिवर्तन के बारे में जानकारी निवेशक को कैसे प्राप्त होगी?
समय–समय पर म्यूचुअल फंड योजना में परिवर्तन हो सकते हैं। मौलिक विशेषताओं में परिवर्तन की सूरत में सूचना पत्र निकास विकल्प अवधि के पूरा होने के (एसआईडी) को तुरंत अपडेट किया जाना चाहिए। अन्य परिवर्तन की सूरत में एएमसी को एडेंडम जारी करने तथा वेबसाइट पर दिखाने की जरूरत होती है। एडेंडम सभी वितरकों/दलालों/यूएफसी में बंटना चाहिए ताकि केआईएम तथा एसआईडी जो स्टॉक में पहले से मौजूद हैं को ताजा किया जा सके। नवीनतम उचित एडेंडम केआईएम तथा एसआईडी का हिस्सा हैं। (उदाहरण के लिए भार संरचना में परिवर्तन के मामले में एडेंडम में नवीनतम उचित भार संरचना और सभी केआईएम तथा एसआईडी जो स्टाक में मौजूद हैं उन्हें जोड़ देना चाहिए। जब तक कि ये अपडेट ना हो जांए। इस तरह के परिवर्तन के संबंध में राष्ट्रीय स्तर केसमाचार पत्र के साथ–साथ के इलाके के क्षेत्रीय भाषा के समाचार पत्र में जहां म्यूचुअल फंड योजना का मुख्यालय है, संबं޵धित जानकारी प्रकाशित होनी चाहिए। इसके अलावा खाता कथन में उचित भार संरचना शामिल होनी चाहिए। केआईएम तथा एसआईडी को वर्ष में एक बार ताजा करना चाहिए।
 
 
म्यूचुअल फंड योजना के प्रदर्शन के बारे में आप कैसे जानेंगें?
योजना का प्रदर्शन उनके (एनएवी) कुल संपति मूल्य ओपेन–एन्डेड योजना में दैनिक तथा क्लोज एन्डेड योजना में साप्ताहिक आधार पर घोषित किया जाना चाहिए। म्यूचुअल फंड के एनएवी को समाचार पत्र में प्रकाशित करने की जरूरत होती है। म्यूचुअल फंड के वेबसाइट पर एनएवी उपलब्ध रहता है। सभी म्यूचुअल फंड को अपना एनएवी भारतीय म्यूचुअल फंड संगठन की वेबसाइट पर रखना जरूरी होता है इस तरह निवेशक सभी म्यूचुअल फंड के एनएवी को एक ही स्थान पर देख सकते हैं।
 
म्यूचुअल फंड को अपने प्रदर्शन को छमाही परिणाम के तौर पर उसके ޵रिटर्न/लाभ, एक अवधि जैसे पिछले छह माह, एक वर्ष, 3 वर्ष या 5 वर्ष तथा योजना की शुरुआत के बाद से प्रकाशित करने की जरूरत होती है। निवेशक कुछ दूसरे विवरण भी देख सकते हैं जैसे कुल संपति के आधार पर छमाही के खर्च का प्रतिशत क्योंकि इससे फायदे तथा अन्य उपयोगी सूचनाओं पर इसका असर पड़ता है।
 
म्यूचुअल फंड को वािर्षक विवरण या संक्षेपित विवरण वर्ष के अंत में यूनिटधारकों पर भेजनी पड़ती है
 
म्यूचुअल फंड योजना पर विविध अध्यन जिसमें विभिन्न योजनाओं के लाभ वित्तीय समाचार पत्र में साप्ताहिक आधार पर प्रकाशित किया जाता है। इसके अलावा कई शोध संस्थाएं म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन पर शोध विवरण भी प्रकाशित करती हैं जिसमें विभिन्न योजनाओं को उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रम दिए जाते हैं निवेशकों को इन विवरणों को अध्ययन करना चाहिए ताकि वो विभिन्न योजनाओं के प्रदर्शन से खुद को सूचित कर सके। निवेशक अपनी योजनाओं के प्रदर्शन की तुलना उसी वर्ग में अन्य म्यूचुअल फंड से कर सकते हैं। वो इ޵क्विटी संबंधित योजनाओं के प्रदर्शन की तुलना बीएसई संवेदी सूचकांक, एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी जैसे स्तरीय सूचकांक से कर सकते हैं।
 
म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन के आधार पर निवेशक ये फैसला ले सकते हैं कि किस म्यूचुअल फंड में कब प्रवेश करना या निकलना चाहिए।
 
 
म्यूचुअल फंड योजना में निवेशकों द्वारा दिए गए पैसों को कहां और कैसे निवेश किया जा सकता है?
म्यूचुअल फंड अपनी पूरी योजना के कागजात को छमाही के आधार पर घोषित करते हुए समाचार पत्र में प्रकाशित की जानी चाहिए। कुछ म्यूचुअल फंड अपने यूनिटधारको को खुला–पत्र भेज देती हैं।
 
योजना के कागजात प्रत्येक प्रतिभूति में जैसे इ޵क्विटी, ऋणपत्र, मुद्रा बाजार के साधन, सरकारी प्रतिभूति आदि तथा उनकी संख्या, बाजार मूल्य तथा एनएवी का प्रतिशत दिखाते हैं। ये कागजात कथनांक खुले पत्र में अंतराल प्रतिभूतियों, दरित तथा अदरित ऋण प्रतिभूतियों में, गैर प्रदर्शनकारी सम्पत्ति (एनपीए) आदि को भी घोषित करने की आवश्कता होती है।
 
कुछ म्यूचुअल फंड शेयरधारकों को चौमाही आधार पर पित्रकाएं भी भेजती हैं जिनमें योजना के कागजात होते हैं।
 
 
अगर विभिन्न म्यूचुअल फंड के एक ही वर्ग में योजनाएं उपलब्घ हैं तो क्या निम्न एनएवी वाली योजना चुननी चाहिए?
कुछ निवेशकों की ये प्रवृत्ति होती है कि वे उच्च एनएवी पर उपलब्ध योजना के बजाय भिन्न एनएवी की योजना को पसंद करते हैं। कभी–कभी वे नई योजना को पसंद करते हैं जो 10 रुपये प्रति इकाई पर जारी होती है जबिक उसी वर्ग में निकासी योजना ज्यादा उच्च एनएवी पर उपलब्ध हैं। निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विभिन्न म्यूचुअल फंड योजना के मामले में एक ही तरह की योजनाओं में एनएवी के उच्च या निम्न होने का कोई फर्क नहीं पड़ता। यह एक भावनात्मक संवेदना हो सकती है लेकिन इसका कोई आर्थिक अर्थ नहीं। दूसरी तरफ निवेशकों को व योजना चुननी चाहिए जो म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन, सेवाओं को स्तर, पेशेवर प्रबंधन आदि के गुण पर आधारित होनी चाहिए। यह निम्नलिखित दिए गए उदाहरण में वर्णित है।
 
मान लीजिए योजना ए 15 रुपये के एनएवी पर उपलब्ध है तथा दूसरी योजना बी 90 रुपये में उपलब्ध है दोनों योजनाएं विविध इ޵क्विटी संबंधी योजनाएं हैं। निवेशक ने इन दोनों योजनाओं में प्रत्येक पर 9000 रुपये लगाए हैं। उसे योजना ए की 600 इकाई (9000/15) प्राप्त हुए तथा योजना बी की 100 यूनिट (9000/90) मिले। ये मानते हुए कि बाजार 10 प्रतिशत ऊपर गया...तथा दोनों योजनओं ने सामान रूप से अच्छा प्रदर्शन किया तथा जो उनके एनएवी से प्रदिर्शत हो रहा है। योजना ए का एनएवी ऊपर उठकर 16.50 रुपये हो गया तथा योजना बी का 99 रुपये। इस तरह से निवेश का बाजार मूल्य योजना ए में 9900 रुपये (600’16.50) तथा योजना बी में यही राशि 9990 रुपये (100’99) होगा। निवेशक को 10 प्रतिशत का ޵रिटर्न प्रत्येक योजना मेंे उसके निवेश पर मिलेगा। इस तरह से योजना के एनएवी में उच्च या निम्न एनएवी तथा एक राशि के अंदर उच्च या निम्न इकाइयों के बंटवारे जिसमें वो निवेश करने की इच्छा रखता है निवेश का फैसला इन वजहों से नही लेना चाहिए। इसी तरह एक नई इ޵क्विटी संबंधित योजना 10 रुपये पर प्रस्तावित की जा रही है तथा एक निकासी योजना 90 रुपये में उपलब्ध है तो ये निवेशक द्वारा फैसला लेने की वजह नही होनी चाहिए। आय या ऋण संबंधी योजना में भी यही होता है।
 
इसलिए निवेशक को योजना के पेशेवर प्रबंधन को ज्यादा ध्यान देना चाहिए ना कि किसी योजना के निम्न एनएवी पर। यहां तक की निकासी योजना में पिछला विवरण तथा योजना के कागजात से नतीजा निकालने का निवेशक को फायदा होता है जो कि उपलब्ध नही होता।
 
 
कई तरह की योजनाओं में से निवेश के लिए किस योजना को चुनना चाहिए?
जैसा कि पहले ही दिया जा चुका है कि निवेशकों को म्यूचुअल फंड के योजना सूचना पत्र को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए वो म्यूचुअल फंड के योजनाओं के पिछले रिकार्ड या अन्य योजनाएं भी देख सकते हैं। वो अन्य योजनाएं जिनके एक समान निवेश मकसद हैं के प्रदर्शन से भी तुलना कर सकते हैं। हालांकि योजना का पूर्व प्रदर्शन से उसके भविष्य के प्रदर्शन का संकेतक नहीं होता है तथा पूर्व में किया गया अच्छा प्रदर्शन भविष्य में जारी रह भी सकता है और नहीं भी। यह निवेश का फैसला लेने में एक महत्वपूर्ण कारक है। ऋण संबंधी योजनाओं के मामले में पूर्व प्राप्त ޵रिटर्न को देखने के अलावा निवेशक को ऋण के साधन की गुणवत्ता को भी देख लेना चाहिए। वो विशेषज्ञों की सलाह भी ले सकते हैं।
 
 
क्या वो कंपिनयां जिनका नाम पारस्पिरक नाम जैसा है क्या वही म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं?
निवेशकों को नहीं मानना चाहिए कि जिन कंपिनयों के नाम पारस्पिरक लाभ हैं वो म्यूचुअल फंड हैं। ये कंपिनयां सेबी के अधिकार क्षेत्र के अंदर नहीं आती हैं। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड निवेशकों से कोष तभी निकाल सकता है जब उसका पंजीकरण सेबी के साथ म्यूचुअल फंड के रूप में हो।
 
 
प्रायोजक की उच्च कुल संपति मूल्य बेहतर ޵रिटर्न की गारंटी है?
किसी भी म्यूचुअल फंड योजना के सूचना पत्र में वित्तीय प्रदर्शन जिसमें प्रायोजक के तीन साल के कुल संपति का ब्योरा देना जरूरी है इसका एक ही मकसद है कि निवेशक उस कंपनी के पिछले प्रदर्शन को जान सके जिसने म्यूचुअल फंड को प्रायोजित किया है। हालांकि प्रायोजकों का उच्च कुल संपति मूल्य का अर्थ ये नही कि योजना बेहतर ޵रिटर्न देगा या प्रायोजक एनएची को गिरने की सूरत में मुआवजा देगा।
 
 
एक निवेशक म्यूचुअल फंड योजना के बारे में सूचनाएं कहां प्राप्त कर सकता है?
लगभग सभी म्यूचुअल फंड का अपना वेबसाइट है। निवेशक को छमाही आधार पर भारतीय म्यूचुअल फंड एशोसिएशन की वेबसाइट पर परिणाम, एनएवी तथा म्यूचुअल फंड के कागजात पा सकता है। एएमएफई ने इस पर निवेशकों के लिए कुछ उपयोगी साहित्य भी प्रकाशित कर रखे हैं।
 
निवेशक सेबी के वेबसाइट http://www.sebi.gov.in इट पर लॉग आन कर सकते हैं तथा म्यूचुअल फंड में जा सकते हैं ताकि सेबी के नियामकों तथा प्रदर्शकों की सूचना म्यूचुअल फंड के आकंडे़, म्यूचुअल फंड द्वारा भरे गए कागजात देखे जा सकें। कई अन्य वेबसाइट भी हैं जो म्यूचुअल फंड के विविध योजनाओं के विषय में सूचनाएं देती हैं। जिसमें एक अवधि के अंतर्गत लाभ भी बताया जाता है। कई समाचार पत्र म्यूचुअल फंड पर दैनिक तथा साप्ताहिक आधार पर महत्वपूर्ण सूचना प्रकाशित करते हैं। निवेशक अपने दलालों तथा वितरकों से इस संबंध में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
 
 
यदि पारस्पिरक योजना बंद हो जाए तो ޵निवेश की गई मुद्रा का क्या होगा?
योजना के बंद होने के मामले में म्यूचुअल फंड खर्चो की व्यवस्था करने के बाद वर्तमान एनएवी पर आधारित एक राशि अदा करता है। यूनिटधारक खर्चो की व्यवस्था करने के बाद उस के बंद होने पर रिपोट‍र् पाने के अघिकारी होते हैं जिसमें सारे विवरण दिए गए होते हैं।
 
 
किस तरह निवेशक अपनी शिकायतों को दर्ज कराता है?
निवेशक म्यूचुअल फंड योजना के प्रस्तावित पत्र में उस व्यक्ति का नाम प्राप्त कर सकता है जिससे कोई सवाल, शिकायत या परेशानियों के बारे में पूछ सकते हैं। म्यूचुअल फंड के न्यासी म्यूचुअल फंड योजना के गितिविधयों पर निगरानी रखते हैं।संपति प्रबंधन समूह के निदेशकों तथा न्यासियों का नाम प्रस्तावित पत्र में दिया गया होता है। निदेशक सेबी को भी अपनी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद सेबी संबंधित म्यूचुअल फंड से चर्चा करता है तथा जब तक मामला हल नही हो जाता है उसका अनुसरण करता है। निवेशक अपनी शिकायतों को यहां भेज सकते हैं:–

प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड आफ इंडिया
प्लाट संख्या, सीए–ए, जी ब्लॉक, बांद्रा कुर्ला कांम्पलेक्स, बांद्रा (पूर्व), मुंबई 40051
टेली :+91–22–26449000/40459000
ईमेल : sebi@sebi.gov.in
कर, कानूनी तथा सामान्य सूचनाएं
 

अ. पारस्पिरक कोषों में निवेश पर कर
 

कोष में कर लाभ के संबंध में घोषणाएं तथा शेयरधारकों की घोषणाएं वर्तमान कर कानून के अनुसार होता है। नीचे दी गई सूचना यूटीआई म्यूचुअल फंड के कर कानूनों की समझ पर आधारित होता है तथा इसका मकसद सिफ‍र् सामान्य सूचनाएं प्रदान करता है। इस बात की कोई गारंटी नही की कर स्थिति हमेशा मौजूद रहेगी।
 
कर लाभ पर इस संबंध में नीचे दिए कथानांक सिर्फ‍ एक विचार हैं और ये म्यूचुअल फंड का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। इस भाग के विषय का, कानूनी कर, निवेश या किसी दूसरी चीज के संबंध में सलाह के तौर पर नही लेना चाहिए।
 
म्यूचुअल फंड से संबंधित कर मामले

यूटीआई म्यूचुअल फंड सेबी के द्वारा पंजीकृत म्यूचुअल फंड हैं तथा वो आयकर धारा 1961 के अनुभाग 10(23डी) के अंतर्गत लाभ के हकदार हैं और जब से इसे धारा के तौर पर जाना जाय इसके अंतर्गत कुल आमदनी आयकर से मुक्त है।

ये म्यूचुअल फंड स्त्रोत पर अनुभाग 196(चार) की धारा के अंतर्गत किसी भी तरह की कटौती के बिना आय अर्जित करेगा।

संपति कर धारा, 1957 के अनुभाग के 45 अनुसार, आयकर धारा 1961 के अनुभाग 10(23डी) के तहत पंजीकृत म्यूचुअल फंड पर कुल संपति के संबंध संपति कर नही गया जाएगा इसलिए यूटीआई म्यूचुअल फंड पर संपति कर धारा, 1957 के प्रस्तावों के अनुसार संपति कर नही अदा करेगा।

यूनिटधारकों के संबंध में कर मामले
 
1. इ޵क्विटी संबंधित कोष–निवेश में कर व्यवस्था
 
 
ए.

इकाइयों के आय संबंधी कर
धारा के अनुभाग 10(35) के अनुसार, म्यूचुअल फंड के योजनाओं के अंतर्गत यूनिटधारकों को होने वाली आमदनी को आयकर से मुक्त रखा गया है 
 

बी.

लाभांश वितरण कर:
धारा के अनुभाग 115(आर) (2) के प्रस्ताव के अनुसार, इ޵क्विटी संबंधित योजनाएं आयकर वितरण कर से मुक्त है। धारा के अनुभाग 115टी के तहत, इ޵क्विटी संबंधी कोष का मतलब ऐसे कोष से है जहां निवेश की जा सकने वाले कोष घरेलू समूहों में इ޵क्विटी शेयर के द्वारा उस कोष के 65 प्रतिशत कोष के रूप में निवेश किए जा सकते हैं। 
 

सी.

इकाइयों की आय पर टीडीएस
धारा के अनुभाग 194के तथा अनुभाग 196ए के प्रस्तावों के अनुसार कोई भी आय जो म्यूचुअल फंड के द्वारा भुगतान या साख के स्त्रोत पर किसी कर की आवश्कयता नही है।
 

डी. पूंजी लाभ पर कर
 
i)

दीर्घ अवधि पूंजी लाभ
धारा के अनुभाग 10(38) के अनुसार,  इ޵क्विटी संबंधी योजना के तहत एक दीर्घ अवधि पूंजी के स्थानांतरण पर होने वाली आय प्रतिभूति स्थानांतरण कर (एसटीटी) कुल आय का भाग नही होता इसलियह आयकर से मुक्त है। धारा के अनुभाग 10(38) के अनुसार, इ޵क्विटी संबंधी कोष का मतलब ऐसे कोष से है जहां निवेश की जा सकने वाले कोष घरेलू समूहों में इ޵क्विटी शेयर के द्वारा उस कोष के 65 प्रतिशत कोष के रूप में निवेश किए जा सकते हैं। जिसकी स्थापना म्यूचुअल फंड के योजना में निर्दिष्ट किया गया आयकर की धारा के अनुभाग10(23डी), 1961 के ज޵रिए
 

ii)

अल्पकालीन पूंजी लाभ
स्थानांतरण की तिथि से 12 महीने से ज्यादा नही रखे जाने वाली इकाई अल्पकालीन पूंजी संपति होते हैं। अल्पकालीन पूंजी संपति के स्थानांतरण से होने वाले पूंजी लाभ की उत्पित्त होती है। इ޵क्विटी संबंधी योजना के इकाई होने पर एसटीटी पर वहन खर्च आयकर की धारा 111 ए तथा 115एडी के तहत 15 प्रतिशत अदा किया जाता है। अगर उपयोगी हो तो दिए गए दर को सरचार्ज लगाकर बढ़ाया जा सकता है।
 

iii)

प्रतिभूति स्थानांतरण कर (एसआईटी)
प्रतिभूति स्थानांतरण कर(एसआईटी) से संबंधित 2004, वित्त (सं0.2) के अध्याय 6 के अनुसार 1 जून 2006 से बेचने की दर 0.25 प्रतिशत पर इ޵क्विटी संबंधी योजना की एक इकाई होने की वजह से देना होगा एसटटी म्यूचुअल फंड के स्त्रोत पर एकित्रत की जाती हैं।
 

  1 अप्रैल 2008 से लागू
 
ए. धारा के अनुभाग 88ई के तहत कमी बंद कर दी गई है,  तथा
 
बी.

प्रतिभूति स्थानांतरण के कर देने वाले वर्ष के द्वारा अदायगी की राशि एक ऐसे उद्यम में शामिल है जिसे धारा के अनुभाग 36 द्वारा इस शर्त पर कि प्रतिभूति स्थानांतरण पर होने वाली आय प्राफिट्स एंड गेन आफ बिजनेस फॉर परफ‍रमेंस आधार पर तय होती है।
 

ई. टीडीएस पर पूंजी कोष
 
 
(i)

निवासीय निवेशक
प्रत्यक्ष कर केंन्द्रीय बोर्ड (सीबीडीटी) 8 अगस्त 1995 की तारीख की सूचना सं0 715 के अनुसार धन देकर इकाइयों के छोड़ने से होने वाले लाभ पर पूंजी लाभ से कुछ नही घटाया जाएगा।
 

(ii)

अप्रवासी निवेशक
दीर्घकालीन पूंजी लाभ

इ޵क्विटी संबंधी कोष के इकाइयों को धन लेकर छोड़ने से होने वाले पूंजी लाभ पर अप्रवासी भारतीय से कोई कर नही लिया जाता।

अल्पकालीन पूंजी लाभ
वित्त अधिनियम 2008 के पहले सूची के भाग 2 के अनुसार (क्लाउज (2)बी(1) म्यूचुअल फंड के अल्पकालीन पूंजी लाभ का 15 प्रतिशत घटाया जाता है। टीडीएस को लागू होने वाले सरचार्ज के द्वारा बढ़ाया जाएगा।
 

(iii)

एक समूह के मामले में
 
घरेलू समूह के अन्य समूह
 
दीर्घकालीन पूंजी लाभ
इ޵क्विटी संबंधी कोष के इकाइयों को धन लेकर छोड़ने से होने वाले पूंजी लाभ पर अप्रवासी भारतीय से कोई कर नही लिया जाता।
 
अल्पकालीन पूंजी लाभ
वित्त अधिनियम 2008 के पहले सूची के भाग 2 के अनुसार (क्लाउज (2)बी(1) म्यूचुअल फंड के अल्पकालीन पूंजी लाभ का 15 प्रतिशत घटाया जाता है। टीडीएस को लागू होने वाले सरचार्ज के द्वारा बढ़ाया जाएगा।
 

(iv)

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई): विदेशी संस्थागत निवेशकों के मामले में धन लेकर इकाइयों को मुक्त करने के दृष्टि को रखते हुए धारा के अनुभाग 196डी(2) के अनुसार पूंजी लाभ के स्त्रोत पर कोई कर नही लगाया जाएगा।
 

शिक्षा उपकर तथा सरचार्ज
लागू किए जा सकने वाले सरचार्ज पर कर/टीडीएस (एसटीटी के अलावा) बढ़ाया जा सकता है। इससे दो प्रतिशत शिक्षा उपकर राशि तथा सरचार्ज 1 प्रतिशत मांगी जाती है।

यूटीआई सेवा޵निवृ޵त्ति योजना, यूटीआई से जुड़ी बीमा योजना, यूटीआई इ޵क्विटी संबंधी बचत योजनाएं (ईएलएसएस) जैसे कि यूटीआई इ޵क्विटी कर बचत योजना (यूटीआई दीर्घकालीन लाभ कोष–श्रृंखला–1 तथा श्रृंखला–2 अनुभाग 80सी के तहत कर लाभ
उपरोक्त योजना में दिया गया योगदान इस योग्य होगा कि उसमें हो सके। यह कटौती पूरी अदा की राशि या जमा रकम पर होगी ले޵किन अ޵धिकतम जमा रा޵शि 100000 रुपये होनी चा޵हिए। यह उस पर लागू होगी ޵जिनका आयकर धारा के अनुभाग 80सी, 1961 के अंतर्गत उल्लेख हो।

पांच वर्ष पूर्व यूलीप का निलंबन
अनुभाग 80 सी के तहत अगर यूनिटधारक आयकर लाभ का फायदा उठाते हैं 80 सी आयकर अधिनियम 1961 के तहत तथा यूलीप में प्रतिभागिता से निलंबित या यूलीप प्रतिभागिता को जब्त कर लिया जाता है किसी भी कारण किसी भी योगदान की अदा करने में विफलता होने पर प्रतिभागिता को पुर्जीवित नहीं करने पर पांच साल तक योगदान दिया जाता रहा अनुभाग 80 सी के अनुसार कोई कमी नही की जाएगी। तथा आय पर औसत राशि में कमी पिछले वर्ष की आय के र्कायकलापों पर इस तरह करने की मंजूरी होगी।

ईएलएसएस के अंतर्गत निवेश
अगर एक यूनिटधारक आयकर की धारा 1961 के अनुभाग 80 सी के तहत आयकर लाभ उठा रहा हो तो निवेश में इकाई मिलने के बाद 3 से कम से कम तीन वर्ष की अवधि तक रखना होगा। इस अवधि के बाद ये इकाई पुन:क्रय के लायक समझी जाएंगी।

इकाई पाने वाले की अगर मृत्यु हो जाए जो नॉमिनी है या कानूनी वारिस जैसा भी मामला हो, यूनिटधारकों को इकाई हासिल होने की तारीख से एक साल के अंदर या उसके बाद कभी वापसी की योग्य होती है।
 

   
2. इक्विटी कोष के अलावा – कर निवेश के तरीके
 
यूनिट धारकों के टैक्स संबंधी मुदे
 
 
अ.

इकाइयों के संबध में आय पर टैक्स
अधिनियम की धारा 10 (35 के अनुसार) म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेशकों को प्राप्त आय में प्राप्तकर्ता शेयर धारकों को आयकर की छूट मिलती है।
 

बी. लाभांश वितरण कर :
 
1) मुद्रा बाजार और लिक्विड योजनाओं के लिए
अधिनियम की धारा 115 आर के अनुसार मुद्रा बाजार के लिए लाभांश वितरण और लिक्विड फंड पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त सरचार्ज है।
 
2)

मुद्रा बाजार और लिक्विड योजनाओं के अलावा अन्य योजनाएं :
अधिनियम की धारा 115 आर के अनुसार वितरण मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत का कर लागू होगा साथ ही व्यक्तिगत रूप से वितरण पर अतिरिक्त कर लगेगा और किसी अन्य व्यक्ति पर 20 प्रतिशत का अतिरिक्त सरचार्ज लगेगा।
 
वर्गीकृत योजनाओं के लिए जैसे कि मुद्रा बाजार म्यूचुअल फंड या लिक्विड फंड के अलावा अधिनियम के धारा 115 आर के अनुसार वितरण मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत और अतिरिक्त भार लागू होगा अगर ये वितरण किसी व्यक्ति या संयुक्त हिन्दू परिवार को होगा और किसी अन्य व्यक्ति पर 20 प्रतिशत का अतिरिक्त सरचार्ज लगेगा। इसके बाद शिक्षा से 2 प्रतिशत और उच्च शिक्षा से 1 प्रतिशत का शुल्क कर और अतिरिक्त सरचार्ज पर लागू होगा। हलांकि अगर ऐसी योजनाएं किसी भी वक्त लिक्विड कोष या मुद्रा बाजार कोष कि तरह हो तो अतिरिक्त आयकर लागू प्रचिलत दर पर लागू होगा जो कि लिक्विड कोष या मुद्रा बाजार कोष पर लागू होता है।
 
अधिनियम की धारा 115 आर के अनुसार वर्तमान आयकर दर म्यूचुअल कोष और लिक्विड फंड के वितरण पर 25 प्रतिशत और लागू अतिरिक्त सरचार्ज के अलावा 2 प्रतिशत शिक्षा से और 1 प्रतिशत उच्च शिक्षा से लागू होगा। अगर ऐसी योजनाओं में आय का वितरण पहले ही किया जा चुका है तो ट्रस्टी या एएमसी के पास ये अधिकार होता है कि वो योजना से सम्बन्धित यूनिट धारकों से भुगतान किये गये आय से आयकर के अतिरिक्त अन्तर को ठीक करे।
 

सी.

यूनिट के मुनाफे पर टीडीएस
अधिनियम की धारा 194के और 196ए के प्रावधान के अनुसार जब भी म्यूचुअल फंड पर कोई आय का भुगतान 1 अप्रैल 2003 को या फिर उसके पहले किया गया हो तो स्रोत में से किसी भी तरह के कर को घटाना जरूरी नहीं है।
 

डी. पूंजीगत लाभ पर टैक्स
 
 
(1)

घरेलू यूनिट धारक 
 
घरेलू यूनिट धारक
कोई भी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ जो की घरेलू धारकों के इकाइयों के घटने पर होता उसे धारा के अधिनियम 48 और 112 के अन्दर रखा जाता है। यूनिट को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के अन्तर्गत 12 महीने से ज्यादा रखने पर 20 प्रतिशत का कर देय होगा और ये सूचकांक के मुद्रास्फिती दर या फिर बिना सूचीकरण के 10 प्रतिशत की दर से कर, जो भी कम होगा उसके अनुसार इसका भुगतान होगा।
 
गैर घरेलू यूनिट धारक
अधिनियम की धारा 115 ई के अनुसार लम्बी अवधि के पूंजी लाभ से अप्रवासी भारतीयों को प्राप्त आय पर यूनिट पर 20 प्रतिशत और सरचार्ज देय होगा, अगर लागू हो तो। अध्याय ग्प्प्। खासकर अप्रवासी भारतीयों के आयकर में कार्य करता है। आयकर के धारा 115 डी के अन्तर्गत एक अप्रवासी भारतीय सूचीकरण के फायदों को प्राप्त नहीं कर सकता है।
 
इसके विकल्प में अप्रवासी भारतीयों द्वारा पूंजी लाभ के आय की गणना धारा 112 के अन्तर्गत की जा सकती है अगर ये उसके लिए ज्यादा फायदेमंद हो तो। धारा 112 के अन्तर्गत लम्बी अवधि के पूंजी लाभ पर 20 प्रतिशत और अतिरिक्त भार कर देना होगा। आयकर अधिनियम 1961 के धारा 48 के अन्तर्गत सूचकांक के फायदे अप्रवासी भारतीयों के लिए भी उपलब्ध है। छोटी अवधि के कैपिटल धन पर लाभ पर कर नियिमत आय के अनुसार लागू/देय है।
 
विदेशी संस्थागत निवेशक –
अधिनियम की धारा 115 एडी के अनुसार लम्बी अवधि का पूंजी लाभ यूनिट के बिक्री पर 10 प्रतिशत की दर से कर लागू है और छोटी अवधि के लाभ पर 30 प्रतिशत का कर देय है। पहले ऐसे लाभ की गणना बिना सूचकांक के लाभ की होती है और दूसरे धारा 48 के अन्तर्गत जो प्रावधान है उसके अनुसार ये थ्प्प्े पर लागू नहीं होती है अधिनियम 115 एडी के 3 के अन्तर्गत। देय कर दर के साथ इस पर सरचार्ज भी बढ़ता है।
 

2)

छोटी अवधि का पूंजी लाभ
जो भी यूनिट स्थानांतर के बाद 12 महीने से ज्यादा पुरानी न हो छोटी अवधि के पूंजी लाभ कहलाते हैं। छोटी अवधि के यूनिट स्थानांतरण से जो लाभ मिलता है उस पर साधारण दर से करों की दर लागू होती है स्थानंतिरत करने वाले पर।
 

इ. कैपिटल लाभ पर टीडीएस
 
1) घरेलू निवेशक
सेन्ट्रल बोर्ड आफ डाइरेक्ट टैक्सेस के 8 अगस्त 1995 के सकु‍र्लर संख्या 715 के अनुसार घरेलू यूनिटधारकों पर कैपिटल से यूनिट के बेचने पर होने वाले लाभ में बिक्री के वक्त किसी भी तरह के कर की जरूरत नहीं होती है।
 
2) अप्रवासी निवेशकों के लिए
लम्बी अवधि के कैपिटल लाभ

वित्त कानून 2008 के प्रथम अनुसूची के भाग {Clause 1 (b) (i) (D) के अनुसार म्यूचुअल फंड में लम्बी अवधि के कैपिटल लाभ पर 20 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा।

छोटी अवधि के कैपिटल लाभ
वित्त कानून 2008 के प्रथम अनुसूची के भाग 2 {Clause 1 (b) (i) (k) के अनुसार म्यूचुअल फंड में छोटी अवधि के कैपिटल लाभ पर 30 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा।
 
इसके बाद शिक्षा से 2 प्रतिशत और सेकेण्डरी और उच्च शिक्षा से 1 प्रतिशत की दर से कर और सरचार्ज की राशि पर देय होगा।
 
3) घरेलू कंपिनयों के अलावा :

लम्बी अवधि के कैपिटल लाभ
वित्त कानून 2008 के प्रथम अनुसूची के भाग 2 {Clause 2 (b) (viii)) के अनुसार म्यूचुअल फंड में लम्बी अवधि के कैपिटल लाभ पर 20 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा।

छोटी अवधि के कैपिटल लाभ
वित्त कानून 2008 के प्रथम अनुसूची के भाग 2 {Clause 2 (b) (ix)) के अनुसार म्यूचुअल फंड में छोटी अवधि के कैपिटल लाभ पर 40 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा।
4) विदेशी संस्थागत निवेशक :

विदेशी संस्थागत निवेशकों के केस में धारा 196 डी 2 के अन्तर्गत पूंजी लाभ से यूनिट के घटने पर आय के स्रोत पर कोई भी कर नहीं वसूला जाएगा।

शिक्षा उपकर और सरचार्ज :
लागू सरचार्ज के अनुसार टीडीएस में बढ़ोतरी होती है। इसके बाद शिक्षा से 2 प्रतिशत और सेकेण्डरी और उच्च शिक्षा से 1 प्रतिशत की दर से कर और सरचार्ज राशि पर देय होगा।
 

इक्विटी आधारित कोष और अन्य इक्विटी आधारित कोष के लिए कुछ साधारण प्रावधान :
 
1. दोहरे कर से बचाव के लिए समझौता
30 अक्टूबर 1995 को सीबीडीटी के सकु‍र्लर संख्या 728 के अनुसार प्रेक्षण वाले देश जहां डीटीएए लागू है वंहा कर उस साल में लागू वित्त कानून के अनुसार कर लागू होगा या जो दर डीटीएए में दिया गया है वो लागू होगा जो भी मूल्यंकन करने वाले के लिए फायदेमंद होगा। यूनिटधारकों को डीटीएए के अन्तर्गत कम दर का लाभ उठाने के लिए अपने मूल्यंकन अधिकारी से म्यूचुअल फंड के साथ एक प्रमाण पत्र लेना होगा जिसमें कम दर की योग्यता को दर्शाया गया हो।
 
2. छोटी अवधि की पूंजी हानि:
अनुच्छेद 94 (7) के अनुसार अगर कोई भी आदमी लाभाशं की घोषणा और वितरण से लाभ या बिक्री के निर्धारित तारीख से 3 महीने पहले यूनिट लेता है या फिर इस तारीख के 9 महीने के अन्दर अगर हस्तांतिरत करता है तो ऐसी बिक्री की आमदनी से होने वाले नुकसान को इस धारा के अन्तर्गत छूट मिली हुई है और कर में इसकी गणना को नजरंदाज किया जाएगा।
 
इसके बाद अनुच्छेद 94 (8) के अनुसार अगर अतिरिक्त यूनिट किसी व्यक्ति को जारी किया जाता है बिना किसी भुगतान के जिसका आधार मौजूदा समय में उस व्यक्ति के पास मौजूद यूनिट और उसके बाद मौलिक यूनिट के बिक्री पर हुए नुकसान को कर के दर की गणना में नजरंदाज किया जाएगा अगर मौलिक यूनिट अतिरिक्त यूनिट प्राप्त करने के निर्धारित तारीख से 3 महीने पहले यूनिट लेता है या फिर इस तारीख के 9 महीने के अन्दर इसे बेचता है। हालंकि ये नुकसान को नजरंदाज किया जाता है क्योंकि यह अतिरिक्त यूनिट जो कि उस व्यक्ति द्वारा बिक्री की तारीख पर रहता है उसे अधिग्रहण के लागत के रूप में माना जाता है।
 
3. न्यास द्वारा निवेश:
म्यूचुअल फंड के स्तर पर यूनिट में निवेश को अनुच्छेद 11 (5) और अनुच्छेद 13 के अन्तर्गत निवेश के लिए योग्य माना गया है पब्लिक रिलजियस एण्ड चैरिटेबल ट्रस्ट 1962 के आयकर कानून 17सी के साथ पढ़ें।
 
4. संप޵ति कर:
म्यूचुअल फंड के यूनिट को धन कर कानून 1957 के अनुच्छेद 2 (ea) के अन्तर्गत संपति के उदाहरण में नहीं रखा गया है इिए यूनिट में निवेश को पूरी तरह से संपति कर से बाहर रखा गया है।
 
5. उपहार कर:
उपहार कर कानून 1958 के अन्तर्गत 1 अक्टूबर 1998 को और उसके बाद दिये गये उपहार से उपहार कर हटा ली गयी है। इसिलए 1 अक्टूबर 1998 को और उसके बाद दिये गये यूनिट उपहार पर उपहार कर की छूट दी गयी। इसके बाद कुछ छूटों के साथ 50 हजार से ऊपर के उपहार पर अनुच्छेद 2; 2(24)(xiv) जिसे अधिनियम 56(2)(vi) के साथ लिया जाएगा, के अनुसार कर लिया जाएगा।
 
वित्त अधिनियम 2009 के अनुसार निजी तौर पर लिए जाने वाले सरचार्ज को निरस्त कर दिया गया।
   
   
सूचना साभार :  
 

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